Thursday, August 2, 2018

महिमा पारद शिवलिंग की

ज्योतिष की दृष्टि से कर्क, वृषभ, तुला, मिथुन और कन्या राशि के जातकों को इसकी पूजा से विशेष फल प्राप्त होते हैं। सामान्य रूप से इसके पूजन से विद्या,धन, ग्रहदोष निवारण, कार्य में आने वाली बाधाएं और ऊपरी बाधाएं दूर होकर सुख -समृद्धि प्राप्त होती है।


सृष्टि के प्रारंभ से ही आशुतोष भगवान सदाशिव की आराधना निराकार और साकार दोनों ही रूपों में की जाती रही है। मनुष्य के अलावा शिव आराधना देवता,दानव, किन्नर,गंधर्व, भूत-प्रेत पिशाचादि इतर योनि के जीव भी करते हैं। शिवभक्त पुष्पदंत के अनुसार महेशान्नापरोदेवो यानी भगवान महेश से बढ़कर कोई अन्य देव नहीं है इसलिए उन्हें महादेव कहा गया है। इनकी लिंग रूप में आराधना युगों-युगों से की जाती रही है। ये लिंग अनेक प्रकार की धातु, मणि, मिट्टी और पाषाण से निर्मित होते हैं हैं। कुछ शिवलिंग स्वयंभू होते हैं तथा कुछ ज्योर्तिलिंग होते हैं। इन सभी प्रकार के शिवलिंगों की आराधना का स्थान और समय के अनुसार अपना अपना महžव है। किंतु इन सबमें सर्वोच्च शिवलिंग पारद धातु से निर्मित माना गया है। रसेन्द्र पुराण में कहा गया है-बद्ध: साक्षात्सदाशिव: यानी दोष हीन बद्ध पारा साक्षात् सदाशिव का ही रूप है। इसलिए महाशिवरात्रि सहित प्रत्येक माह में पड़ने वाल प्रदोष व्रत पर इसकी उपासना विशेष पुण्यदायिनी होती है।

इस शिवलिंग में शिव-शक्ति लक्ष्मी, कुबेर सहित तैंतीस कोटि देवता का निवास होता है। इसे घर में स्थापित करने पर भूमिदोष,पितृदोष,कुल देवी देवता के दोष और नवग्रह से होने वाली पीड़ा से मुक्ति मिलती है। पारद शिवलिंग को रसलिंग भी कहा जाता है। भगवान शंकर के जितने नाम कहे गए हैं उतने ही नाम पारद के भी बतलाए हैं। बद्ध पारद और भगवान शिव में कोई अन्तर नहीं है। इनका ध्यान करने से मन की चंचलता शांत होती है। संपूर्ण त्रैलोक्य में मन को शांत और नियंत्रित करने का एकमात्र उपाय रसलिंग का पूजन और दर्शन है। इस लिंग पूजा के पांच प्रकार बताए गए हैं। भक्षण ( पारद से निर्मित भस्मों से रोगोपचार), स्पर्शन ( रसलिंग को स्पर्श करना), दान ( रसलिंग का दान करना),ध्यान ( इसके दिव्य स्वरूप का ध्यान करना) तथा परिपूजन ( षोडशोपचारादि पूजन करना)। इनमें भक्षण को छोड़कर शेष चार प्रकार की अर्चना सभी के द्वारा की जा सकती है।
पारद में एक अरब गुण होते हैं। इसके दर्शन,स्पर्श और पूजन से मिलने वाले फल के बारे में कहा गया है कि जो मनुष्य भक्ति पूर्वक रसलिंग बनाकर पूजन करता है वह तीनों लोकों में जितने शिवलिंग हैं,उन सब की पूजा के फल को प्राप्त होता है। स्वयंभू सहस्रों शिवलिंगों की पूजा करने से जो फल प्राप्त होता है,उससे करोड़ गुना फल पारद शिवलिंग की पूजा से प्राप्त होता है।

केदारादीनि लिंगानि पृथिव्यां यानि कानिचित।
तानि दृष्टवा य यत्पुण्यं तत्पुण्यं रसदर्शनात्।।

यानी इस पृथ्वी पर केदारनाथ से लेकर जितने भी शिवलिंग हैं उन सबके दर्शन करने से जो पुण्य प्राप्त होता है,वह पुण्य केवल पारदशिवलिंग के दर्शन मात्र से होता है। अन्य स्थान पर कहा गया है कि हे पार्वती! जो मनुष्य ह्वदय कमल में स्थित पारद का स्मरण करता है,वह अनेक जन्मों के संचित पापों से तत्काल छूट जाता है। पारद शिवलिंग की महिमा का वर्णन इन शब्दों मे पढ़कर स्वत: श्रद्धा जाग्रत हो जाती है- जो पुण्य एक सौ अश्वमेध यज्ञ करने से ,करोड़ो गाएं दान करने से, एक हजार तोला स्वर्ण दान करने से तथा सब तीर्थो में अभिषेक करने से होता है, वही पुण्य पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से होता है।

सर्वसिद्धिप्रदं देविं सर्वकामफलप्रदम्।
स्मरणं रस राजस्य सर्वोपद्रवनाशनम्।।

हे देवि ! रसराज के स्मरण मात्र से सर्वप्रकार की सिद्धि, सब कार्यो में सफलता तथा सभी उपद्रवों का नाश होता है।

सप्तद्वीपे धरण्यांच पाताले गगने दिवि।
यान्यर्चयन्ति लिंगानि तत्पुण्यं रस पूजया।।

सातों द्वीपों,पृथ्वी,पाताल,गगन एवं दिशाओं में स्थित शिवलिंगों के पूजन से जो पुण्य होता है,वही पुण्य केवल पारदशिवलिंग की पूजा से प्राप्त होता है।

पूजन विघि
महाशिवरात्रि के दिन दोपहर में जिस समय अभिजित मुहूर्त हो, दस संस्कारों से संस्कारित पारद धातु का अंगुष्ठ प्रमाण का शिवलिंग बनवाकर अपने पूजा कक्ष में ईशान्य कोण में स्थापित करें। लिंग का षोडषोपचार पूजन से करने अथवा करवाने के बाद रूद्राक्ष की माला से ऊं पारदेश्वराय नम: इस मंत्र की आवृत्ति एक हजार आठ बार करें। इसके बाद प्रतिदिन शिवलिंग का सावधानीपूर्वक स्त्रान, धूप,दीप, नैवेद्य सहित अर्चना करते हुए एक पुष्प अर्पण करें। उपर्युक्त मंत्र की एक सौ आठ आवृत्ति कम से कम अवश्य करें। ज्योतिष की दृष्टि से कर्क, वृषभ, तुला, मिथुन और कन्या राशि के जातकों को इसकी पूजा से विशेष फल प्राप्त होते हैं। सामान्य रूप से इसके पूजन से विद्या,धन, ग्रहदोष निवारण, कार्य में आने वाली बाधाएं और ऊपरी बाधाएं दूर होकर सुख -समृद्धि प्राप्त होती है। यह आराधना एक साल तक निर्बाध रूप से करते रहने पर साक्षात शिव की कृपा होती है।

ज्योतिर्विद् डॉ. गोविन्द माहेश्वरी,
संविदा प्राध्यापक, ज्योतिर्विज्ञान अध्ययनशाला,
विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन 

Thursday, July 12, 2018

करोड़ मंत्रों के तुल्य -om नम: शिवाय




पंचाक्षरेण मंत्रेण पत्रं पुष्पमथापि वा
य: प्रयच्छति शर्वाय तदनंतफलं सकृत
पांच अक्षरों के मंत्र अर्थात 'om नम: शिवायÓ का जाप करना तथा इस मंत्र के द्वारा जो भ मनुष्य पत्र-पुष्प 
और जल इत्यादि का समर्पण देवासुरेश्वर भगवान शंकर को एक बार भी करता है, तो वह अनंत फल पाता है।
 भगवान आदि अनंत शिव शंकर के मुखारविंद से सात करोड़ मंत्र निकले, परंतु वे सभी मंत्र मिलकर भी इस पंचाक्षरी मंत्र की सोलहवीं 
कला के समान भी नहीं होते हैं। विधि-विधान से दीक्षित हो अथवा अदीक्षित हो, कैसा भी क्यों न हो,
 मनुष्य मात्र तो क्या, जो भी प्राणी इस पंचाक्षरी मंत्र का जाप किया करता है, वह अवश्य ही भगवान 
शंकर का भक्त हो जाया करता है। घोर पापी भी पापों से तुरंत ही मुक्त हो जाया करता है, इसमें जरा 
भी संदेह नहीं है। समस्त लोकों व सृष्टियों तथा तीनों भुवनों में 
इस पांच अक्षरों वाले मंत्र से अधिक कुछ 
भी श्रेय नहीं है। पंचाक्षरी मंत्र के द्वारा बिल्व के पत्तों से जो
 मनुष्य भगवान शिव का पूजन करता है,
 वह ईश्वरीय पद को प्राप्त करता है।

शिव पूजा से पाएं कष्टों से मुक्ति व मोक्ष


रोग शांति के लिए : उड़द से शिवलिंग का पूजन करने से रोग की शांति होती है। विधिपूर्वक पूजन

 व मंत्रों से शिवलिंग का ढाई-ढाई घटी बिना धारा तोड़े अभिषेक करने से असाध्य से असाध्य रोगों 
में भी लाभ होता है। यह पूजन तब तक जारी रहे जब तक शिवजी के सहस्र नामों का जप पूर्ण नहीं हो जाता।
संतान सुख के लिए : शिवलिंग की सहस्रनामों से , नाना प्रकार के शुभ द्रव्यों से पूजा करने तथा मंत्रों 
से घी की धारा से अभिषेक करने पर संतान सुख मिलता है। अभिषेक तब तक करते रहें जब तक नामों 
का जप पूर्ण नहीं हो जाता।
लक्ष्मी प्राप्ति के लिए : नाना प्रकार की सामग्रियों से शिवजी की पूजा करने तथा बिल्वपत्रों 
को पंचाक्षरी मंत्र का उच्चारण करते हुए एक लाख की संख्या में चढ़ाएं। इच्छापूर्ति होगी।
शत्रु नाश के लिए : राई के पुष्पों से शिवजी का पूजन करने से शत्रुओं का नाश होता है। शत्रुओं को 
मृत्युतुल्य कष्ट होता है। राई के पुष्पों से पूजन के साथ सरसों के तेल की धारा से शिवलिंग का 
अभिषेक करने से शत्रु नष्ट होते हैं, किंतु सावधान, बिना गुरु या पंडित के यह पूजन पूजनकर्ता के
 लिए प्राणघातक हो सकता है।
मोक्ष के लिए : अगस्त्य के एक लाख फूलों से पूजन व तुलसी पत्रों से पूजन तथा तिल के पुष्पों से 
विशेष पूजन करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
दिव्य गंधों से पूजन

जो मनुष्य शिवलिंग का पूजन दिव्य गंधों से करता है, वह सौ करोड़ दिव्य वर्षों तक भगवान के
 लोक शिवलोक में निवास करता है। चंदन के लेपन से किसी अन्य सुगंधित पदार्थ के लेपन से
 दोगुना फल प्राप्त होता है। चंदन से भी अधिक गुणा पुण्य फल अगरू के लेपन से प्राप्त होता है। 
अगरू से भी अधिक सौगुणा पुण्य फल कुमकुम के लेपन से मिलता है। चंदन, अगरू, कपूर, नाभिरोचन, 
कुमकुम इन सबसे जो शिवलिंग का विलेपन करता है उसे गाणपत्य पद की प्राप्ति होती है। 
जो मनुष्य भगवान शिव के लिए विधिपूर्वक जो भी अर्पण करता है, वह करोड़ों वर्षों तक भगवान 
शिव के लोक शिवपुर में निवास करता है।

किस फूल के चढ़ाने से मिलेगा लाख गुणा फल


आक के फूलों से की गई पूजा श्रेष्ठ मानी जाती है। सौ करवीर के फूलों सं अधिक श्रेष्ठ बिल्वपत्र

 माना गया है। एक सौ बिल्वपत्र से श्रेष्ठ कुश और सौ कुश से भी श्रेष्ठ शमी के फूल माने गए हैं।
 धतूरे के फूल भी श्रेष्ठ माने गए हैं। इनसे भगवान शिव का जो प्राणी भक्तियुक्त विधि-विधान से 
पूजन करता है, वह करोड़ों कल्पों तक शिवपुर में निवास करता है।

न चढ़ाएं ऐसे फूल
शिव पूजा बंधूक की तरह का फूल, कुंद, केतकी, यूथिका, मदंतिका, शिरीष और अर्जुन के पुष्पों
 से भगवान शिव का पूजन नहीं करना चाहिए। यह फूल पूजा में वर्जित माने गए हैं।
शिवलिंग पर चढ़ाए गए अलग-अलग वृक्षों के फूल एक प्रहर से लेकर चार पहर तक ठहरता है, 
जो फूल केश और कीटों से युक्त हों, पदुर्षित हो तथा स्वयं ही गिर हुए हों उनका त्याग कर देना चाहिए।
 किसी भी वृक्ष की कलियों से शिव का पूजन नहीं करना चाहिए। यदि फूलों का लाभ न हो, तो ऐ
सी दशा में पत्रों को भगवान शिव के लिए निवेदित करना चाहिए।
चार कोस तक स्वायंभुव शिवलिंग क्षेत्र

देवों के देव भगवान शिव की महिमा समस्त भवुनों में फैली है। प्रभु अपने भक्तों को दुलभ वर प्रदान 

करते हैं। शिवालय के चारों ओर एक कोस तक शिव का ही क्षेत्र माना जाता है। यदि इस क्षेत्र में देहधारी 
प्राण त्यागते हैं या उनकी मृत्यु होती है, तो वह शिवलोक को जाते हैं। मनुष्यों द्वारा स्थापित शिवलिंग 
अर्थात शिवालय के चारों ओर एक कोस तक शिव का क्षेत्र बतलाया गया है। जिस क्षेत्र में स्वायंभुव 
शिवलिंग है, वहां एक योजन (चार कोस) तक शिव का क्षेत्र है। ऋषियों द्वारा स्थापित शिवलिंग हो,
 तो दो कोस तक शिव का क्षेत्र कहा गया है। कैसा भी पाप करने वाला कोई भी मनुष्य वहां पर मृत
 हो जाए, तो वह भी शिवलोक में प्रतिष्ठित हुआ करता है, जो कि देवों के लिए भी दुर्लभ है। इसलिए सभी 
प्रयत्नों से वहां पर स्नानादि करना चाहिए और शिव क्षेत्र में समीप ही निवास करना चाहिए।
 जो मनुष्य शिवालय में कुआं या बावड़ी बनवाता है, वह अपने इक्कीस कुलों सहित शिवलोक में प्रतिष्ठित 
हुआ करता है।

Sunday, April 1, 2018

लाल किताब के सिद्ध टोटके

नानक दुखिया सब संसार ! आज संसार में हर आदमी दुखी है ! चाहे अमीर हो या गरीब, बडा हो या छोटा ! हर इंसान को कोई न कोई परेशानी लगी रहती है ! ज्योतिष में इसके लिए कई उपाय सुझाए गए हैं ! जिनको विधि पूर्वक करके हम लाभ उठा सकते हैं ! लाल किताब उत्तर भारत में खास कर पंजाब में बहुत प्रसिद्ध है ! अब इसका प्रचार धीरे-धीरे पूरे भारत में हो रहा है ! इसकी लोकप्रियता का मुख्य कारण इसके आसान, सस्ते और सटीक उपाय हैं ! इसमें कई उपाय ग्रहों की बजाय लक्षणों से बताये जाते हैं ! आपके लाभ के लिए कुछ सिद्ध उपाय निम्न प्रकार से हैं – 1. यदि आपको धन की परेशानी है, नौकरी मे दिक्कत आ रही है, प्रमोशन नहीं हो रहा है या आप अच्छे करियर की तलाश में है तो यह उपाय कीजिए : किसी दुकान में जाकर किसी भी शुक्रवार को कोई भी एक स्टील का ताला खरीद लीजिए ! लेकिन ताला खरीदते वक्त न तो उस ताले को आप खुद खोलें और न ही दुकानदार को खोलने दें ताले को जांचने के लिए भी न खोलें ! उसी तरह से डिब्बी में बन्द का बन्द ताला दुकान से खरीद लें ! इस ताले को आप शुक्रवार की रात अपने सोने के कमरे में रख दें ! शनिवार सुबह उठकर नहा-धो कर ताले को बिना खोले किसी मन्दिर, गुरुद्वारे या किसी भी धार्मिक स्थान पर रख दें ! जब भी कोई उस ताले को खोलेगा आपकी किस्मत का ताला खुल जायगा ! 2. यदि आप अपना मकान, दुकान या कोई अन्य प्रापर्टी बेचना चाहते हैं और वो बिक न रही हो तो यह उपाय करें : बाजार से 86 (छियासी) साबुत बादाम (छिलके सहित) ले आईए ! सुबह नहा-धो कर, बिना कुछ खाये, दो बादाम लेकर मन्दिर जाईए ! दोनो बादाम मन्दिर में शिव-लिंग या शिव जी के आगे रख दीजिए ! हाथ जोड कर भगवान से प्रापर्टी को बेचने की प्रार्थना कीजिए और उन दो बादामों में से एक बादाम वापिस ले आईए ! उस बादाम को लाकर घर में कहीं अलग रख दीजिए ! ऐसा आपको 43 दिन तक लगातार करना है ! रोज़ दो बादाम लेजाकर एक वापिस लाना है ! 43 दिन के बाद जो बादाम आपने घर में इकट्ठा किए हैं उन्हें जल-प्रवाह (बहते जल, नदी आदि में) कर दें ! आपका मनोरथ अवश्य पूरा होगा ! यदि 43 दिन से पहले ही आपका सौदा हो जाय तो भी उपाय को अधूरा नही छोडना चाहिए ! पूरा उपाय करके 43 बादाम जल-प्रवाह करने चाहिए ! अन्यथा कार्य में रूकावट आ सकती है ! 3. यदि आप ब्लड प्रेशर या डिप्रेशन से परेशान हैं तो : इतवार की रात को सोते समय अपने सिरहाने की तरफ 325 ग्राम दूध रख कर सोंए ! सोमवार को सुबह उठ कर सबसे पहले इस दूध को किसी कीकर या पीपल के पेड को अर्पित कर दें ! यह उपाय 5 इतवार तक लगातार करें ! लाभ होगा ! 4. माईग्रेन या आधा सीसी का दर्द का उपाय :
सुबह सूरज उगने के समय एक गुड का डला लेकर किसी चौराहे पर जाकर दक्षिण की ओर मुंह करके खडे हो जांय ! गुड को अपने दांतों से दो हिस्सों में काट दीजिए ! गुड के दोनो हिस्सों को वहीं चौराहे पर फेंक दें और वापिस आ जांय ! यह उपाय किसी भी मंगलवार से शुरू करें तथा 5 मंगलवार लगातार करें ! लेकिन….लेकिन ध्यान रहे यह उपाय करते समय आप किसी से भी बात न करें और न ही कोई आपको पुकारे न ही आप से कोई बात करे ! अवश्य लाभ होगा ! 5. फंसा हुआ धन वापिस लेने के लिए :
यदि आपकी रकम कहीं फंस गई है और पैसे वापिस नहीं मिल रहे तो आप रोज़ सुबह नहाने के पश्चात सूरज को जल अर्पण करें ! उस जल में 11 बीज लाल मिर्च के डाल दें तथा सूर्य भगवान से पैसे वापिसी की प्रार्थना करें ! इसके साथ ही “ओम आदित्याय नमः “ का जाप करें ! .
नोट :
1. लाल किताब के सभी उपाय दिन में ही करने चाहिए ! अर्थात सूरज उगने के बाद व सूरज डूबने से पहले !
2. सच्चाई व शुद्ध भोजन पर विशेष ध्यान देना चाहिए !
3. किसी भी उपाय के बीच मांस, मदिरा, झूठे वचन, परस्त्री गमन की विशेष मनाही है ! 4. सभी उपाय पूरे विश्वास व श्रद्धा से करें, लाभ अवश्य होगा !
धन समृधि के अचूक टोटके

1 यदि आप व्यवसायी हैं, पुराने उद्योग के चलते नया उद्योग आरम्भ कर रहे हों तो अपने पुराने कारखाने से कोई भी लोहे की वास्तु ला कर अपने नए उद्योग स्थल में रख दें। जिस स्थान पर इस को रखेंगे वहां पर स्वस्तिक बनाएं और वहां पर थोड़े से काले उडद रखें उसके ऊपर उस वस्तु को रख दें। ऐसा करने से नवीन उद्योग भी पुराने उद्योग की तरह सफलता पूर्वक चल पड़ता है।


2 यदि आप के कर्मचारी अक्सर छोड़कर जाते हैं तो इसको रोकने के लिये आपको यदि रास्ते में पडी हुए कोई कील मिले, यदि वह दिन शनिवार हो तो अति उत्तम है। इसे भैंस के मूत्र से धो लें। जिस जगह के कर्मचारी ज्यादा छोड़ कर जाते हैं। वहां पर इस कील को गाद दें इस के फलस्वरूप कर्मचारी स्थिर हो जायेंगे। इस बात का भी ध्यान रखें कि आपके कर्मचारी इस प्रकार अपना काम करें कि काम करते समय उनका मुख पूर्व या उत्तर की ओर रहे।


3 यदि धन की कमी हो या किसी का धन कहीं अटक गया हो तो शुक्ल पक्ष के गुरूवार से अपने माथे पर केसर एवं चन्दन का तिलक लगाना आरम्भ कर दें। प्रत्येक गुरूवार को रामदरबार के सामने दण्डवत प्रणाम कर मनोकामना करें, कार्य सफल हो जाएगा।


4 यदि धन टिकता नहीं है तो प्रत्येक शनिवार को काले कुत्ते को तेल से चुपड़ी रोटी खिलाएं। रोटी खिलाने के पश्चात मनोकामना करें। ऐसा प्रत्येक शनिवार को करने से धन टिकता है।


5 आर्थिक कष्टों से निपटने के लिये किसी भी मन्दिर में सिद्ध मूहर्त में केले के दो पौधे (नर एवं मादा) लगाएं तथा इन्हें नियमित सीचें। जब यह फल देने लग जाए तो समझो आपके आर्थिक कष्ट दूर होने वाले हैं।


6 अचानक धन प्राप्ति के लिये पांच गोमती चक्र ले कर लाल वस्त्र में बाँध कर अपनी दुकान की चौखट पर बाँध दें। यह कार्य शुक्रवार के दिन शुभ मूहर्त में करें।


7 दीपावली की संध्या को अशोक वृक्ष की पूजा करें ओर उस वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं। दूज के दिन उसी पूजित वृक्ष की जड़ का एक हिस्सा अपने पास रखें। धनागमन होगा।


8 घर में या कार्यालय में 6 मोर पंख रखें इससे आपके घर व कार्यालय पर किसी की नजर नहीं लगेगी।


9 सूर्यास्त के समय आधा किलो गाय के कच्चे दूध में 9 बूँदें शहद की डाल दें। स्नान करने के पश्चात अपने मकान की छ्त से आरम्भ कर मकान के प्रत्येक कमरे व भाग में इस दूध के छीटें लगाएं। ध्यान रहे कि घर का कुछ भी हिस्सा न बचे। अब इस में बचे हुए दूध को अपने मुख्यद्वार के सामने धार देते हुए गिरा दें। ऐसा 21 दिन तक लगातार करें। छीटें डालते समय जिस देवी देवता को आप मानते हों उससे मन ही मन अपने आर्थिक कष्टों, प्रमोशन आदि की कामना करते रहें।


10 घर या दुकान के दरवाजे पर सफ़ेद सरसों रखने से दुकान में बिक्री करते है।


11 किसी भी शुभ तिथि एवं वार वाले इन दिन यदि ज्येष्ठ नक्षत्र हो तो जामुन की जड़ निकाल कर लायें। इसे आप अपने पास रखें। आपको राज्य सम्मान मिलेगा।


12 यदि आप का धन कहीं फंसा हुआ (रुका हुआ) है तो इसको निकलवाने के लिये रोजाना लाल मिर्च के ग्यारह बीज जलपात्र में डालकर सूर्य को अर्ध्य दें। ॐ सूर्याय नमः कहते हुए अपने रुके धन की प्राप्ति की प्रार्थना करें।


13 यदि आप व्यापार के लिये बाहर जा रहे हैं तथा एक नीबों ले कर उस पर चार लौंग गाड़ दें। तथा ॐ श्री हनुमते नमः का 21 बार जप करके इस नींबू को अपने साथ ले जाएँ, व्यापार में सफलता मिलेगी।


14 गेहूं पिसवाते समय उसमें 11 पत्ते तुलसी और थोड़ा सा केसर डाल कर पिसवा लें। इसको पिसवाने से पूर्व इसमें से एक मुट्ठी मिश्रण को एक रात्रि के लिये किसी मन्दिर में रख दें। उसे अगले दिन वहां से वापस लाकर इस मिश्रण में मिला दें। इसके पश्चात ही सम्पूर्ण मिश्रण को पिसवाएं। ऐसा जब भी आप आटा पिसवाने को जाएं उससे एक दिन पूर्व करें। ऐसा करने से घर में बरकत रहेगी।


15 कारोबार में उन्नति के लिये एक टोटका यह है, किसी भी शुक्ल पक्ष की शुक्रवार को सवा किलो काले चने भिगो दें। इसे अगले दिन सरसों के तेल में बना लें इसके अब तीन हिस्से कर लें। एक हिस्सा शनिवार को ही घोड़े या भैंस को खिला दें, एक हिस्सा किसी कोढी या अंग विहीन भिकारी को दे आये तथा एक हिस्सा अपने सिर से उलटा फेर कर इसे एक दोने में रख कर किसी चौराहे पर रख दें ऐसा प्रयोग 40 शनिवार को करें।


16 एक मिटटी का बना शेर बुधवार को दुर्गा माता के आगे चढाने से सब कार्य पूर्ण हो जाते हैं।


17 व्यापार में वृद्धि के लिये एक और टोटका है। एक पीपल का पत्ता शनिवार को तोड़ कर घर ले आयें। उसे गंगा जल से अच्छी तरह धो लें। इसको 21 बार गायत्री मंत्र से अभिमंत्रित कर इसे अपने कैश बाक्स में रखें। ऐसा हर शनिवार को करें। नया पत्ता रखने पर पुराना पत्ता वहां से हटा लें। इस जल में बहा दें या पीपल पर चढ़ा दें।


18 बिक्री बढाने के लिये 11 गुरूवार को अपने व्यापार स्थल के मुख्य द्वार पर हल्दी से स्वस्तिक बना लें। इस पर थोड़ी चने की दाल एवं गुड रख दें। अगले सप्ताह इस सामग्री को वहां से हटा कर किसी मन्दिर में चढ़ा दें।


19 अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिये शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को हरे हकीम की 54 नागों की एक माला लक्ष्मी जी को चढ़ाएं।


20 बेरोजगार को रोजगार पाने के लिये प्रत्येक बुधवार को गणेश जी को मूंगा के लड्डू चढाने चाहिए। उस दिन व्रत भी रखें। शीघ्र ही रोजगार प्राप्त होगा।


21 नौकरी प्राप्ति के लिये एक बारहमुखी रुद्राक्ष को अभिमंत्रित कर गले में धारण करें।

1. आर्थिक समस्या के छुटकारे के लिए :

यदि आप हमेशा आर्थिक समस्या से परेशान हैं तो इसके लिए आप 21 शुक्रवार 9 वर्ष से कम आयु की 5 कन्यायों को खीर व मिश्री का प्रसाद बांटें !

2. घर और कार्यस्थल में धन वर्षा के लिए :

इसके लिए आप अपने घर, दुकान या शोरूम में एक अलंकारिक फव्वारा रखें ! या

एक मछलीघर जिसमें 8 सुनहरी व एक काली मछ्ली हो रखें ! इसको उत्तर या उत्तरपूर्व की ओर रखें ! यदि कोई मछ्ली मर जाय तो उसको निकाल कर नई मछ्ली लाकर उसमें डाल दें !
3. परेशानी से मुक्ति के लिए :

आज कल हर आदमी किसी न किसी कारण से परेशान है ! कारण कोई भी हो आप एक तांबे के पात्र में जल भर कर उसमें थोडा सा लाल चंदन मिला दें ! उस पात्र को सिरहाने रख कर रात को सो जांय ! प्रातः उस जल को तुलसी के पौधे पर चढा दें ! धीरे-धीरे परेशानी दूर होगी !

4. कुंवारी कन्या के विवाह हेतु :

१. यदि कन्या की शादी में कोई रूकावट आ रही हो तो पूजा वाले 5 नारियल लें ! भगवान शिव की मूर्ती या फोटो के आगे रख कर “ऊं श्रीं वर प्रदाय श्री नामः” मंत्र का पांच माला जाप करें फिर वो पांचों नारियल शिव जी के मंदिर में चढा दें ! विवाह की बाधायें अपने आप दूर होती जांयगी !

२. प्रत्येक सोमवार को कन्या सुबह नहा-धोकर शिवलिंग पर “ऊं सोमेश्वराय नमः” का जाप करते हुए दूध मिले जल को चढाये और वहीं मंदिर में बैठ कर रूद्राक्ष की माला से इसी मंत्र का एक माला जप करे ! विवाह की सम्भावना शीघ्र बनती नज़र आयेगी
5. व्यापार बढाने के लिए :

१. शुक्ल पक्ष में किसी भी दिन अपनी फैक्ट्री या दुकान के दरवाजे के दोनों तरफ बाहर की ओर थोडा सा गेहूं का आटा रख दें ! ध्यान रहे ऐसा करते हुए आपको कोई देखे नही !

२. पूजा घर में अभिमंत्रित श्र्री यंत्र रखें !
३. शुक्र्वार की रात को सवा किलो काले चने भिगो दें ! दूसरे दिन शनिवार को उन्हें सरसों के तेल में बना लें ! उसके तीन हिस्से कर लें ! उसमें से एक हिस्सा घोडे या भैंसे को खिला दें ! दूसरा हिस्सा कुष्ठ रोगी को दे दें और तीसरा हिस्सा अपने सिर से घडी की सूई से उल्टे तरफ तीन बार वार कर किसी चौराहे पर रख दें ! यह प्रयोग 40 दिन तक करें ! कारोबार में लाभ होगा !
6. लगातार बुखार आने पर :

१. यदि किसी को लगातार बुखार आ रहा हो और कोई भी दवा असर न कर रही हो तो आक की जड लेकर उसे किसी कपडे में कस कर बांध लें ! फिर उस कपडे को रोगी के कान से बांध दें ! बुखार उतर जायगा !

२. इतवार या गुरूवार को चीनी, दूध, चावल और पेठा (कद्दू-पेठा, सब्जी बनाने वाला) अपनी इच्छा अनुसार लें और उसको रोगी के सिर पर से वार कर किसी भी धार्मिक स्थान पर, जहां पर लंगर बनता हो, दान कर दें !
३. यदि किसी को टायफाईड हो गया हो तो उसे प्रतिदिन एक नारियल पानी पिलायें ! कुछ ही दिनों में आराम हो जायगा !
7. नौकरी जाने का खतरा हो या ट्रांसफर रूकवाने के लिए :

पांच ग्राम डली वाला सुरमा लें ! उसे किसी वीरान जगह पर गाड दें ! ख्याल रहे कि जिस औजार से आपने जमीन खोदी है उस औजार को वापिस न लायें ! उसे वहीं फेंक दें दूसरी बात जो ध्यान रखने वाली है वो यह है कि सुरमा डली वाला हो और एक ही डली लगभग 5 ग्राम की हो ! एक से ज्यादा डलियां नहीं होनी चाहिए !

8. कारोबार में नुकसान हो रहा हो या कार्यक्षेत्र में झगडा हो रहा हो तो :

यदि उपरोक्त स्थिति का सामना हो तो आप अपने वज़न के बराबर कच्चा कोयला लेकर जल प्रवाह कर दें ! अवश्य लाभ होगा !

9. मुकदमें में विजय पाने के लिए :

यदि आपका किसी के साथ मुकदमा चल रहा हो और आप उसमें विजय पाना चाहते हैं तो थोडे से चावल लेकर कोर्ट/कचहरी में जांय और उन चावलों को कचहरी में कहीं पर फेंक दें ! जिस कमरे में आपका मुकदमा चल रहा हो उसके बाहर फेंकें तो ज्यादा अच्छा है ! परंतु याद रहे आपको चावल ले जाते या कोर्ट में फेंकते समय कोई देखे नहीं वरना लाभ नहीं होगा ! यह उपाय आपको बिना किसी को पता लगे करना होगा !

10. धन के ठहराव के लिए :

आप जो भी धन मेहनत से कमाते हैं उससे ज्यादा खर्च हो रहा हो अर्थात घर में धन का ठहराव न हो तो ध्यान रखें को आपके घर में कोई नल लीक न करता हो ! अर्थात पानी टप–टप टपकता न हो ! और आग पर रखा दूध या चाय उबलनी नहीं चाहिये ! वरना आमदनी से ज्यादा खर्च होने की सम्भावना रह्ती है !

11. मानसिक परेशानी दूर करने के लिए :

रोज़ हनुमान जी का पूजन करे व हनुमान चालीसा का पाठ करें ! प्रत्येक शनिवार को शनि को तेल चढायें ! अपनी पहनी हुई एक जोडी चप्पल किसी गरीब को एक बार दान करें !

12. बच्चे के उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु के लिए :

१. एक काला रेशमी डोरा लें ! “ऊं नमोः भगवते वासुदेवाय नमः” का जाप करते हुए उस डोरे में थोडी थोडी दूरी पर सात गांठें लगायें ! उस डोरे को बच्चे के गले या कमर में बांध दें !

२. प्रत्येक मंगलवार को बच्चे के सिर पर से कच्चा दूध 11 बार वार कर किसी जंगली कुत्ते को शाम के समय पिला दें ! बच्चा दीर्घायु होगा !
13. किसी रोग से ग्रसित होने पर :

सोते समय अपना सिरहाना पूर्व की ओर रखें ! अपने सोने के कमरे में एक कटोरी में सेंधा नमक के कुछ टुकडे रखें ! सेहत ठीक रहेगी !

14. प्रेम विवाह में सफल होने के लिए :

यदि आपको प्रेम विवाह में अडचने आ रही हैं तो :

शुक्ल पक्ष के गुरूवार से शुरू करके विष्णु और लक्ष्मी मां की मूर्ती या फोटो के आगे “ऊं लक्ष्मी नारायणाय नमः” मंत्र का रोज़ तीन माला जाप स्फटिक माला पर करें ! इसे शुक्ल पक्ष के गुरूवार से ही शुरू करें ! तीन महीने तक हर गुरूवार को मंदिर में प्रशाद चढांए और विवाह की सफलता के लिए प्रार्थना करें !
15. नौकर न टिके या परेशान करे तो :

हर मंगलवार को बदाना (मीठी बूंदी) का प्रशाद लेकर मंदिर में चढा कर लडकियों में बांट दें ! ऐसा आप चार मंगलवार करें !

16. बनता काम बिगडता हो, लाभ न हो रहा हो या कोई भी परेशानी हो तो :

हर मंगलवार को हनुमान जी के चरणों में बदाना (मीठी बूंदी) चढा कर उसी प्रशाद को मंदिर के बाहर गरीबों में बांट दें !

17. यदि आपको सही नौकरी मिलने में दिक्कत आ रही हो तो :

१. कुएं में दूध डालें! उस कुएं में पानी होना चहिए !

२. काला कम्बल किसी गरीब को दान दें !
३. 6 मुखी रूद्राक्ष की माला 108 मनकों वाली माला धारण करें जिसमें हर मनके के बाद चांदी के टुकडे पिरोये हों !
18. अगर आपका प्रमोशन नहीं हो रहा तो :

१. गुरूवार को किसी मंदिर में पीली वस्तुये जैसे खाद्य पदार्थ, फल, कपडे इत्यादि का दान करें !

२. हर सुबह नंगे पैर घास पर चलें !
19. पति को वश में करने के लिए :

यह प्रयोग शुक्ल में पक्ष करना चाहिए ! एक पान का पत्ता लें ! उस पर चंदन और केसर का पाऊडर मिला कर रखें ! फिर दुर्गा माता जी की फोटो के सामने बैठ कर दुर्गा स्तुति में से चँडी स्त्रोत का पाठ 43 दिन तक करें ! पाठ करने के बाद चंदन और केसर जो पान के पत्ते पर रखा था, का तिलक अपने माथे पर लगायें ! और फिर तिलक लगा कर पति के सामने जांय ! यदि पति वहां पर न हों तो उनकी फोटो के सामने जांय ! पान का पता रोज़ नया लें जो कि साबुत हो कहीं से कटा फटा न हो ! रोज़ प्रयोग किए गए पान के पत्ते को अलग किसी स्थान पर रखें ! 43 दिन के बाद उन पान के पत्तों को जल प्रवाह कर दें ! शीघ्र समस्या का समाधान होगा !

नोट :

1. लाल किताब के सभी उपाय दिन में ही करने चाहिए ! अर्थात सूरज उगने के बाद व सूरज डूबने से पहले !

2. सच्चाई व शुद्ध भोजन पर विशेष ध्यान देना चाहिए !
3. किसी भी उपाय के बीच मांस, मदिरा, झूठे वचन, परस्त्री गमन की विशेष मनाही है !

4. सभी उपाय पूरे विश्वास व श्रद्धा से करें, लाभ अवश्य होगा !


5. एक दिन में एक ही उपाय करना चाहिए ! यदि एक से ज्यादा उपाय करने हों तो छोटा उपाय पहले करें ! एक उपाय के दौरान दूसरे उपाय का कोई सामान भी घर में न रखें !

6. जो भी उपाय शुरू करें तो उसे पूरा अवश्य करें ! अधूरा न छोडें !

Wednesday, March 28, 2018

आसाम का काला जादू और तंत्र सिद्ध महिलाए

आसाम को ही पुराने समय में कामरूप प्रदेश के रूप में जाना जाता था। कामरुप प्रदेश को तन्त्र साधना के गढ़ के रुप में दुनियाभर में बहुत नाम रहा है। पुराने समय में इस प्रदेश में मातृ सत्तात्मक समाज व्यवस्था प्रचलित थी, यानि कि यंहा बसने वाले परिवारों में महिला ही घर की मुखिया होती थी। कामरुप की स्त्रियाँ तन्त्र साधना में बड़ी ही प्रवीण होती थीं। बाबा आदिनाथ, जिन्हें कुछ विद्वान भगवान शंकर मानते हैं, के शिष्य बाबा मत्स्येन्द्रनाथ जी भ्रमण करते हुए कामरुप गये थे। बाबा मत्स्येन्द्रनाथ जी कामरुप की रानी के अतिथि के रुप में महल में ठहरे थे। बाबा मत्स्येन्द्रनाथ, रानी जो स्वयं भी तंत्रसिद्ध थीं, के साथ लता साधना में इतना तल्लीन हो गये थे कि वापस लौटने की बात ही भूल बैठे थे। बाबा मत्स्येन्द्रनाथ जी को वापस लौटा ले जाने के लिये उनके शिष्य बाबा गोरखनाथ जी को कामरुप की यात्रा करनी पड़ी थी। 'जाग मछेन्दर गोरख आया' उक्ति इसी घटना के विषय में बाबा गोरखनाथ जी द्वारा कही गई थी।
कामरुप में श्मशान साधना व्यापक रुप से प्रचलित रहा है। इस प्रदेश के विषय में अनेक आश्चर्यजनक कथाएँ प्रचलित हैं। पुरानी पुस्तकों में यहां के काले जादू के विषय में बड़ी ही अद्भुत बातें पढऩे को मिलती हैं। कहा जाता है कि बाहर से आये युवाओं को यहाँ की महिलाओं द्वारा भेड़, बकरी बनाकर रख लिया जाता था।
आसाम यानि कि कामरूप प्रदेश की तरह ही बंगाल राज्य को भी तांत्रिक साधनाओं और चमत्कारों का गढ़ माना जाता रहा है। बंगाल में आज भी शक्ति की साधना और वाममार्गी तांत्रिक साधनाओं का प्रचलन है। बंगाल में श्मशान साधना का प्रसिद्ध स्थल क्षेपा बाबा की साधना स्थली तारापीठ का महाश्मशान रहा है। आज भी अनेक साधक श्मशान साधना के लिये कुछ निश्चित तिथियों में तारापीठ के महाश्मशान में जाया करते हैं। महर्षि वशिष्ठ से लेकर बामाक्षेपा तक अघोराचार्यों की एक लम्बी धारा यहाँ तारापीठ में बहती आ रही है।

108 नामावली - श्री हनुमान जी के 108 नाम

हनुमान जी के प्रसिद्ध नाम और उनका मुख्य अर्थ :
ॐ हनुमते नमः
ॐ श्रीप्रदाया नमः
ॐ वायुपूत्राया नमः
ॐ अजराया नमः
ॐ अमृत्याया नमः
ॐ मारुताथमज़ाया नमः
ॐ विराविराया नमः
ॐ ग्रामवासाया नमः
ॐ जनश्रयड़ायाया नमः
ॐ रुद्राया नमः
ॐ अनागाया नमः
ॐ धनदायाया नमः
ॐ अकायाये नमः
ॐ विरये नमः
ॐ वागमिने नमः
ॐ पिंगाकशाये नमः
ॐ वारदाये नमः
ॐ सीता शोकविनाशनाये नमः
ॐ रक्तावाससे नमः
ॐ शिवाये नमः
ॐ निधिपटये नमः
ॐ मुनाये नमः
ॐ शरवाये नमः
ॐ व्यक्ताव्यकताये नमः
ॐ रासाधराये नमः
ॐ पिंगाकेशाये नमः
ॐ पिंगरोमने नमः
ॐ श्रुतिगामयाये नमः
ॐ सानातनाया नमः
ॐ पराये नमः
: ॐ अव्यकताये नमः
ॐ अनादाये नमः
ॐ भगवाते नमः
ॐ डेवाये नमः
ॐ विश्वहेटावे नमः
ॐ निराश्रयाये नमः
ॐ आरोगयकारते नमः
ॐ विश्वेश्वाये नमः
ॐ विश्वानायाकाये नमः
ॐ हरिश्वराये नमः
ॐ विश्वमुरताया नमः
ॐ विश्वकाराये नमः
ॐ विषडाये नमः
ॐ विश्वात्मनाय नमः
ॐ विश्वाहाराया नमः
ॐ राव्याय नमः
ॐ विश्वचेशलाये नमः
ॐ विश्वासेवायाय नमः
ॐ विश्वाया नमः
ॐ विश्वागम्याय नमः
ॐ विश्वाध्ययाये नमः
ॐ बालाये नमः
ॐ वृधाध्यये नमः
ॐ यूनाया नमः
ॐ कलाधराये नमः
ॐ प्लावंगगमये नमः
ॐ कपिशेषतया नमः
ॐ विडयाये नमः
ॐ ज्येष्ताये नमः
ॐ तटवाये नमः
वनचराये नमः
ॐ तत्वगामयये नमः
ॐ सखये नमः
ॐ अजाये नमः
ॐ अंजनीसूनावे नमः
ॐ अवायगराये नमः
ॐ भार्गाये नमः
ॐ रामाये नमः
ॐ रामभक्ताये नमः
ॐ कल्याणाये नमः
ॐ प्राकृतिस्तिराया नमः
ॐ विश्वंभाराये नमः
ॐ ग्रामासवंताय नमः
ॐ धराधराय नमः
ॐ भुरलोकाय नमः
ॐ भुवरलोकाय नमः
ॐ स्वर्गालोकाया नमः
ॐ महालोकाय नमः
ॐ जनलोकाय नमः
ॐ तापसे नमः
ॐ अव्यायाया नमः
ॐ सत्याये नमः
ॐ ओंकार्जमयाये नमः
ॐ प्राणवाये नमः
ॐ व्यापकाये नमः
ॐ अमलाये नमः
ॐ शिवधर्मा-प्रतिष्ताये नमः
ॐ रमेशतात्राया नमः
ॐ फाल्गुणप्रियायेया नमः
ॐ राक्षोधनाया नमः
ॐ पंदारिकाक्षायाया नमः
ॐ दिवाकाराया नमः
ॐ समप्रभाये नमः
ॐ द्रोनहार्ताया नमः
ॐ शक्ति राक्षसाया नमः
ॐ गोसपदिकृिताया नमः
ॐ वारिशाये नमः
ॐ पूर्णकमाया नमः
ॐ धरा धिप्प्याय नमः
ॐ शक्ति राक्षसाया नमः
ॐ मारकायाया नमः
ॐ रामदूठाया नमः
ॐ कृष्णाया नमः
ॐ शरणागतवत्सलाया नमः
ॐ जानकीपराणदाताया नमः
ॐ रक्षप्रानहारकाया नमः
ॐ पूर्णाया नमः
ॐ सत्याये नमः
ॐ पितावाससेया नमः
ॐ डेवाया नमः
यही हनुमान जी बजरंग बलि के 108 नामावली है